पिथौरागढ़। अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी द्वारा जे बी मैमोरियल मानस एकैडमी पिथौरागढ़ में ‘बालसाहित्य और बच्चे’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मानस एकैडमी के निदेशक डॉ. अशोक पंत ने कहा कि आज के दौर में बालसाहित्य बहुत लिखा जा रहा है। उस साहित्य को बच्चों तक पहुंचाना आज प्रमुख चुनौती है।
उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए बालसाहित्य रचनाकारों को बच्चा बनकर लिखना होगा। बाल मनोविज्ञान को समझकर बच्चों के लिए लिखना होगा। राष्ट्रीय स्तर पर दीवार पत्रिका अभियान को नई पहचान दिलाने वाले शिक्षक व साहित्यकार महेश पुनेठा ने कहा कि बच्चों के लिए वैज्ञानिक सोच आधारित बाल साहित्य लिखा जाना चाहिए।
कुमाउनी पत्रिका ‘आदलि कुशलि’ की संपादक डा. सरस्वती कोहली ने कहा कि वैश्वीकरण के आज के दौर में बच्चे हिंदी, अंग्रेजी, जापानी व चीनी आदि दूसरी भाषाएं सीख रहे हैं। यह जरूरी है। बच्चों के लिए स्थानीय परिवेश पर लिखने के साथ ही बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने की जरूरत है।
सेवानिवृत्त शिक्षक व साहित्यकार चिंतामणी जोशी ने कहा कि इंटर्नेट व मोबाइल के आज के दौर में बालसाहित्य लेखन में काफ़ी संभावनाएं हैं पर जरूरत है कि बच्चों के मनोविज्ञान को समझते बच्चों के लिए लिखा जाए। संगोष्ठी का संचालन करते हुए शिक्षक रमेश जोशी ने कहा कि बच्चों को अभिव्यक्ति का अवसर देने के लिए उन्हें लेखन के लिए प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है।
बाल प्रहरी संपादक उदय किरौला ने सभी का स्वागत करते हुए बालप्रहरी व बाल साहित्य संस्थान की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि 12,13 व 14 जून, 2026को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान डीडीहाट में बाल साहित्य पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाना है। उन्होंने सभी को संगोष्ठी के लिए आमंत्रित किया।
संगोष्ठी में बालसाहित्यकार डॉ. प्रमोद श्रोत्रिय, देवाशीष पंत,जयमाला देवलाल, मुन्नी पांडे, ऋतम श्रोत्रिय, भावना भट्ट, बेला भट्र, गिरीश पुजारा,विमल कुमार जोशी, सौरभ भट्ट, गजेंद्र सिंह बोहरा, गोविंद बल्लभ उपाध्याय आदि ने अपने विचार रखे।
