भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट अल्मोड़ा निवासी बीरेश्वर गोस्वामी जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में बीते शनिवार को ‘आपरेशन शेरूवाली’ के दौरान बलिदान हो गए। जैसे ही यह समाचार मिला पूरे क्षेत्र में शोक छा गया।

मात्र 25 साल की आयु में देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले बीरेश्वर का पार्थिव शरीर रविवार अपराह्न पांडेखोला स्थित उनके आवास पर पहुंचा। बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि और अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचे। देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले लाल की मां ने पार्थिव शरीर से लिपटकर रुंधे गले से शाबास बेटा कहा और बदहवास हो गईं। इसके बाद विश्वनाथ श्मशानघाट पर पूरे सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ बीर जवान का अंतिम संस्कार किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक चंद्रशेखर आर घोड़के, अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र एवं सैन्य अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

2024 में भारतीय सेना की 5 असम रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइन किया था

वीरगति को प्राप्त हुए बीरेश्वर गोस्वामी ने जून, 2024 में भारतीय सेना की 5 असम रेजीमेंट में लेफ्टिनेंट के पद पर ज्वाइन किया था। उनका परिवार वर्तमान में यहां पाण्डेखोला स्थित होली एंजिल अपार्टमेंट में निवास करता है, जो मूल रूप से अल्मोड़ा जनपद के बग्वालीपोखर क्षेत्र के ग्राम बाड़ी निवासी हैं। बीरेश्वर के पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी जिले की भनोली तहसील में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर सेवारत हैं, जबकि माता सरस्वती गोस्वामी शिक्षिका हैं। दो भाईयों में बीरेश्वर छोटे थे, उनका बड़ा भाई अनिरूद्ध गोस्वामी डीएलएड की पढ़ाई कर रहा है। शहीद के माता, पिता व भाई समेत सगे संबंधियों का रो-रोकर बुरा हाल है।

प्रमोशन से पहले ही बलिदान हो गए बीरेश्वर

बीरेश्वर बचपन से ही मेहनती, मेधावी और प्रतिभा थे। अनुशासन, हिम्मत और देशभक्ति के लिए वह खास पहचान रखते थे। बताया जा रह है कि कल यानी सोमवार को उनका प्रमोशन कैप्टन पद पर होना था, मगर प्रमोशन पाने से पहले ही वह वीरगति को प्राप्त हो गए।