पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ के लगातार प्रयासों से 1980 में दिवंगत हुए सैनिक की पत्नी को मिली पारिवारिक पेंशन
पिथौरागढ़।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ ने एक बार फिर यह साबित किया है कि संगठन केवल पूर्व सैनिकों की समस्याओं को सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके समाधान तक लगातार प्रयास करना ही संगठन का वास्तविक उद्देश्य है।
वर्ष 2024 में दिवंगत सैनिक की पुत्री श्रीमती जीवंती देवी ने अपने परिवार की वर्षों पुरानी और बेहद पीड़ादायक समस्या को लेकर संगठन के क्षेत्र संयोजक कैप्टन दीवान सिंह सेना मेडल साहब से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता, जिनका निधन वर्ष 1980 में ही हो चुका था, उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पार्वती देवी इतने लंबे समय बाद भी अपनी पारिवारिक पेंशन के अधिकार से वंचित थीं।
मामला संगठन के संज्ञान में आते ही इसे गंभीरता से लिया गया। संगठन के वरिष्ठ सलाहकार एवं कार्यालय प्रबंधक सूबेदार मेजर दिवाकर बोहरा साहब ने परिवार से संबंधित सभी दस्तावेज और आवश्यक जानकारी जुटाकर प्रकरण को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। इसके बाद संबंधित कार्यालयों और विभागों से लगातार पत्राचार एवं संपर्क किया गया। सेना द्वारा आयोजित सेवा शिविरों तथा रिकॉर्ड ऑफिस से आए अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समक्ष भी इस मामले को लगातार रखा गया और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती रही।
लगभग चार दशकों से अधिक समय से लंबित इस मामले में परिवार ने भी एक समय अपनी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन संगठन के निरंतर प्रयासों से आखिरकार उम्मीद की एक नई किरण दिखाई दी और अब श्रीमती पार्वती देवी को उनकी पारिवारिक पेंशन का अधिकार प्राप्त हुआ है।
यह केवल एक पेंशन स्वीकृत होने की बात नहीं है, बल्कि यह उस वयोवृद्ध सैनिक परिवार को उसका हक, सम्मान और आत्मविश्वास वापस मिलने की बात है, जिसका इंतजार वर्षों से चला आ रहा था।
इस सफलता पर श्रीमती पार्वती देवी एवं उनकी पुत्री श्रीमती जीवंती देवी ने पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ का आभार व्यक्त किया है।
पूर्व सैनिक संगठन पिथौरागढ़ का कहना है कि किसी सैनिक ने देश के लिए अपना जीवन दिया है तो उसके परिवार को अपने अधिकार के लिए दर-दर भटकना नहीं चाहिए। संगठन का प्रयास रहेगा कि जनपद के किसी भी पूर्व सैनिक अथवा सैनिक परिवार की समस्या सामने आए तो उसे संबंधित विभाग और सक्षम स्तर तक मजबूती से उठाया जाए तथा उसके समाधान तक प्रयास जारी रखा जाए।