पिथौरागढ़ ।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुंजी में आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 में किया प्रतिभाग, रं समुदाय की पारंपरिक वेशभूषा पहनाकर किया गया भव्य स्वागत

सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन, साहसिक खेलों और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता: मुख्यमंत्री

अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में आयोजित होगी ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’, माणा पास से औली तक पहुंचेगी दौड़

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गूंजी पहुंचकर आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में प्रतिभाग किया। यहां उन्होंने 70 किलोमीटर और 42 किलोमीटर की दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत किया तथा उनके जज्बे की सराहना की। गूंजी हेलीपैड पर दर्जा राज्य मंत्री अशोक नबियाल, पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल, मुख्य विकास अधिकारी डॉ दीपक सैनी, आईटीबीपी, भारतीय सेना, एसएसबी के अधिकारियों सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर रं समुदाय की ओर से मुख्यमंत्री को समुदाय की पारंपरिक पगड़ी ‘बैंटिलो’ एवं पारंपरिक पुरुष परिधान ‘रंगा’ पहनाकर सम्मानित किया गया। पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से रं समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली।

मुख्यमंत्री ने आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 के सफल आयोजन में भारतीय सेना, एसएसबी एवं आईटीबीपी द्वारा किए गए सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया तथा उनको सम्मानित भी किया।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भगवान शिव के पावन धाम आदि कैलाश में आयोजित ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0’ में प्रतिभाग करते हुए देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे धावकों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन केवल एक मैराथन नहीं, बल्कि प्रतिभागियों की शारीरिक क्षमता, आत्मविश्वास, इच्छाशक्ति, साहस और संकल्प की परीक्षा है। समुद्र तल से अत्यधिक ऊंचाई पर कठिन पहाड़ी रास्तों और बदलते मौसम के बीच दौड़ना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए बाबा भोलेनाथ से उनकी सफलता और सुरक्षित यात्रा की कामना की।

मुख्यमंत्री ने भारतीय सेना, एसएसबी एवं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के अधिकारियों और जवानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कड़ाके की ठंड के बावजूद हमारे वीर जवान देश की सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा में समर्पित सभी जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन के प्रथम संस्करण में 700 से अधिक धावकों ने प्रतिभाग किया था। प्रथम संस्करण की सफलता के बाद आदि कैलाश क्षेत्र में पर्यटकों और साहसिक खेल प्रेमियों का आकर्षण लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में इस क्षेत्र के लिए लगभग 36,500 इनर लाइन परमिट जारी किए गए थे, जबकि इस वर्ष अभी तक यह संख्या बढ़कर 67000 हजार से अधिक हो गई थी। यह परिवर्तन सीमांत क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटन और इनकी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होती पहचान का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा सीमांत गांवों को देश के अंतिम नहीं, बल्कि पहले गांव के रूप में विकसित करने का विजन दिया है। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले नागरिक देश की सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ाए जाएं।

उन्होंने कहा कि आदि कैलाश परिक्रमा रन जैसे साहसिक आयोजन सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन आयोजनों से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती है तथा स्थानीय होमस्टे, पर्यटन गाइड, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सेवाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलते हैं। इस प्रकार के प्रयास प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के विजन को धरातल पर साकार करने में सहायक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में इस वर्ष नीति घाटी में ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का आयोजन किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली। उन्होंने कहा कि सरकार अल्ट्रा रन के साथ-साथ एंगलिंग, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेन साइक्लिंग और पर्वतारोहण जैसे साहसिक खेलों को भी प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा कि औली की बर्फीली ढलानों से लेकर ऋषिकेश में मां गंगा की लहरों तक, मुनस्यारी की ऊंची पर्वत चोटियों से लेकर टिहरी झील तक उत्तराखंड साहसिक खेलों के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। राज्य ने बीते वर्षों में साहसिक खेलों और विभिन्न बड़े आयोजनों की सफल मेजबानी कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

माणा पास से औली तक आयोजित होगी 100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार अगले वर्ष मई के प्रथम सप्ताह में ‘100 माइल्स हिमालयन एंड्योरेंस अल्ट्रा रन’ का आयोजन करेगी। यह दौड़ लगभग 5,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माणा पास से प्रारंभ होकर बदरीनाथ और जोशीमठ होते हुए औली तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से देश-विदेश के धावकों को उत्तराखंड की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, हिमालयी भूगोल और साहसिक खेलों की संभावनाओं से रूबरू होने का अवसर मिलेगा। इससे सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को विस्तार मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।