पिथौरागढ़। 

जनपद पिथौरागढ़ में पूर्व सैनिकों का ऐतिहासिक धरना आज 53वें दिन भी लगातार जारी रहा। यह धरना जनपद के इतिहास में पूर्व सैनिकों द्वारा किया जा रहा सबसे लंबा आंदोलन बन चुका है, जिसमें 60 से 85 वर्ष तक के वरिष्ठ पूर्व सैनिक विपरीत मौसम के बावजूद अपने सम्मान, अधिकार और जनपद के भविष्य की रक्षा के लिए डटे हुए हैं।

पूर्व सैनिकों ने आरोप लगाया कि सरकार की उपेक्षा और अनदेखी के कारण उन्हें मजबूर होकर धरने का मार्ग अपनाना पड़ा है। एक ओर जहां पूर्व सैनिक अपने सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा “सम्मान यात्राएं” निकालकर अपनी विफलताओं को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़ ने इसे “दोहरे मापदंड” और “वोट बैंक की राजनीति” करार देते हुए कड़े शब्दों में निंदा की है।

संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि जनपद के भविष्य, रोजगार, पलायन रोकने और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे जमीनी मुद्दों के लिए है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी धरोहर और सम्मान की रक्षा हेतु संघर्ष कर रहे हैं।

विशेष रूप से यह भी उल्लेख किया गया कि धरने में शामिल कई पूर्व सैनिक ऐसे हैं जिन्होंने देश के लिए एक से अधिक युद्धों में भाग लिया है। ऐसे वीरों के सम्मान को नजरअंदाज कर राजनीतिक लाभ के लिए “सम्मान यात्राएं” निकालना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

आज धरना स्थल पर धारचूला विधायक हरीश धामी जी ने पहुंचकर अपना नैतिक समर्थन दिया तथा इस मामले में सक्रिय हस्तक्षेप का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि “एक पूर्व सैनिक का पुत्र होने के नाते यह मेरा नैतिक दायित्व है कि मैं इस न्यायपूर्ण लड़ाई में पूर्ण रूप से साथ खड़ा रहूं।”

पूर्व सैनिक संगठन ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील करते हुए कहा कि पूर्व सैनिकों का उपयोग राजनीतिक उद्देश्यों के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक सम्मान और संवेदनशीलता के साथ किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि यदि सरकार धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों की पीड़ा को समझकर समाधान निकालती है, तो यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी उनके दिवंगत सैनिक पिता की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाले सम्मान कार्यक्रम के प्रति अन्यथा यह केवल एक राजनीतिक भावनाओं से ओ त प्रोतबैंक की राजनीति की कही जाएगी।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और निर्णायक रूप दिया जाएगा।
आज धरना स्थल पर समर्थन देने वालों में नीतिन सागर, चंचल बोहरा, मुकेश पंथ, उत्तराखंड क्रांति दल के गोविन्द बिष्ट, विक्रम पोखरिया, खड़क ऐरी, के.एन. भट्ट, मनोहर बेलाल, महेश चंद, पर्मिला बोहरा, भुवन गड़कोटी सहित सैकड़ों पूर्व सैनिक एवं आमजन मौजूद रहे।