पिथौरागढ़। महानिदेशक, सशस्त्र सीमा बल श्री संजय सिंघल (भा.पु.से.) ने दिनांक 28 से 31 मई 2026 को 11वीं और 55वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, पिथौरागढ़ का चार दिवसीय भ्रमण किया। उनके आगमन पर वाहिनी मुख्यालय में गरिमामय एवं पारंपरिक सैन्य रीति-रिवाजों के अनुरूप भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात उन्हें सुसज्जित परेड दल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया, इस अवसर पर श्री महेन्द्र प्रताप, कमांडेंट 55वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, पिथौरागढ़ द्वारा वाहिनी की प्रचालन व प्रशासनिक गतिविधियों, उपलब्धियों एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं से अवगत कराया गया।


भ्रमण के दौरान महानिदेशक महोदय ने सीमाचौकी जौलजीबी का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था, गश्ती प्रणाली, संचार तंत्र तथा उपलब्ध संसाधनों की समीक्षा की। उन्होंने वहां तैनात अधिकारियों एवं जवानों से आत्मीय संवाद स्थापित करते हुए उनके अनुभव, चुनौतियों एवं सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना। विषम भौगोलिक परिस्थितियों, प्रतिकूल मौसम एवं सीमित संसाधनों के बावजूद पूर्ण निष्ठा, सतर्कता एवं साहस के साथ कर्तव्य निर्वहन कर रहे जवानों की उन्होंने भूरि-भूरि प्रशंसा की तथा उनके मनोबल को सुदृढ़ करने हेतु प्रेरणादायी संदेश दिया।


इसके उपरांत महानिदेशक महोदय ने वाहिनी मुख्यालय परिसर में प्रचलित विभिन्न निर्माण एवं अधोसंरचना विकास कार्यों का अवलोकन किया। उन्होंने आवासीय भवनों, प्रशासनिक कार्यालयों, प्रशिक्षण स्थलों एवं अन्य सुविधाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए गुणवत्ता मानकों के पालन पर विशेष बल दिया। संबंधित अधिकारियों को उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, ताकि जवानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।


भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित सैनिक सम्मेलन में महानिदेशक महोदय ने सभी अधिकारियों एवं जवानों को संबोधित किया। उन्होंने जवानों की समस्याओं एवं सुझावों को गंभीरतापूर्वक सुना तथा उनके त्वरित एवं प्रभावी समाधान हेतु सकारात्मक आश्वासन प्रदान किया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि सीमाओं पर तैनात जवान राष्ट्र की सुरक्षा के प्रथम प्रहरी हैं, जिनकी प्रतिबद्धता, अनुशासन एवं त्याग देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा सुनिश्चित करते हैं। परिवारों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में सेवा देना अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने सभी कार्मिकों से उच्च स्तर का अनुशासन, समर्पण, पेशेवर दक्षता एवं मानवीय संवेदनशीलता बनाए रखने का आह्वान किया।


पर्यावरण संरक्षण एवं हरित पहल को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महानिदेशक महोदय ने वाहिनी परिसर में पौधारोपण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है तथा सुरक्षा बलों को इस दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

इसके साथ ही श्रीमती कविता सिंघल, संदीक्षा अध्यक्षा, सशस्त्र सीमा बल, बल मुख्यालय, नई दिल्ली का 55वीं वाहिनी में आगमन पर श्रीमती प्रियंका प्रामाणिक, संदीक्षा उपाध्यक्षा, 55वीं वाहिनी द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर हार्दिक स्वागत किया गया। स्वागत अवसर पर उत्तराखंड के पारंपरिक लोकनृत्य ‘छोलिया नृत्य’ की आकर्षक प्रस्तुति दी गई, जिसने कार्यक्रम में सांस्कृतिक गरिमा एवं उत्साह का संचार किया। इस दौरान 55वीं वाहिनी के समस्त संदीक्षा परिवार के सदस्यों द्वारा उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया।
तत्पश्चात श्रीमती कविता सिंघल द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में संदीक्षा परिवार की महिलाओं एवं बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। रंगारंग कार्यक्रमों ने उपस्थित सभी जनों का मन मोह लिया और वातावरण को उल्लासमय बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संदेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वृक्षारोपण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रीमती कविता सिंघल एवं संदीक्षा परिवार के सदस्यों द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। उपस्थित सभी सदस्यों को अधिकाधिक वृक्ष लगाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया।