130 पर्यावरण बटालियन एवं पूर्व सैनिक संगठन के सहयोग से 5000 पौधों का वृहद वृक्षारोपण
पिथौरागढ़ । जनपद के सुवाकोट क्षेत्र में सेवानिवृत्त सैनिक एवं सरपंच कैप्टेन भूपेंद्र सिंह सोन द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल करते हुए 130 पर्यावरण बटालियन तथा पूर्व सैनिक संगठन के सहयोग से लगभग 5000 पौधों का वृहद वृक्षारोपण किया गया। वर्षों से वीरान पड़ी भूमि को हरित बनाने की इस मुहिम ने पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण का एक नया संदेश दिया है।
कैप्टेन भूपेंद्र सिंह सोन ने सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी राष्ट्र सेवा की भावना को जीवित रखते हुए अब प्रकृति और समाज की सेवा का संकल्प लिया है। उनके नेतृत्व में आयोजित इस अभियान में फलदार एवं अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाए गए, जो आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र को हरित, समृद्ध एवं पर्यावरण की दृष्टि से अधिक सुरक्षित बनाएंगे। यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य प्राकृतिक धरोहर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हर वर्ष बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाते हैं, किन्तु उचित संरक्षण एवं देखरेख के अभाव में अधिकांश पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए कैप्टेन भूपेंद्र सिंह सोन ने पूर्व सैनिक संगठन एवं क्षेत्र के पूर्व सैनिकों के साथ मिलकर प्रत्येक पौधे की नियमित देखभाल और संरक्षण का संकल्प लिया है। ग्रामवासियों ने भी इन पौधों की वर्षों तक सुरक्षा एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया, जिससे इस अभियान की सफलता सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर 130 पर्यावरण बटालियन के उप कमान अधिकारी कर्नल वी.एस. दानू, सूबेदार मेजर कुलदीप सिंह , ग्राम प्रधान सुवाकोट, सरपंच सुवाकोट, वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी, नर्मदे स्कूल कैलाश आश्रम सुवाकोट, शिशु विद्या पीठ वड्डा, विश्व भारती पब्लिक स्कूल वड्डा, असम राइफल्स के हेमंत सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, मातृशक्ति एवं ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
पूर्व सैनिक संगठन की ओर से कैप्टेन दीवान सिंह (सेना मेडल), भूपेंद्र बोहरा, सुभाष भट्ट, परमानंद भट्ट, नंदा सिंह बिष्ट, जीत गोबाड़ी सहित अनेक पूर्व सैनिक इस अभियान में उपस्थित रहे।
पूर्व सैनिक संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इसी प्रकार जनसहभागिता, अनुशासन और संरक्षण की भावना के साथ वृक्षारोपण अभियान चलाए जाएँ, तो आने वाले वर्षों में सुवाकोट क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण का एक आदर्श मॉडल बनकर पूरे जनपद के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
जय हिंद
