पिथौरागढ़ ।वनाग्नि मॉक ड्रिल 2026 के लिए जिला स्तरीय समन्वय बैठक कलेक्ट्रेट सभागार , पिथौरागढ़ में जिलाधिकारी आशीष भटगांई की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में सभी संबंधित विभागों और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और वनाग्निकाल 2026 से पूर्व तत्परता, सुरक्षा प्रोटोकॉल, सामुदायिक सहभागिता और अंतर-विभागीय समन्वय पर विस्तार से चर्चा की। पिथौरागढ़ वन प्रभाग द्वारा आयोजित जिला स्तरीय समन्वय बैठक में डीएफओ आशुतोष सिंह ने वनाग्नि मॉक ड्रिल 2026 की तैयारी पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि बैठक का उद्देश्य वनाग्निकाल 2026 से पूर्व सभी विभागों और स्थानीय समुदाय की तत्परता सुनिश्चित करना है।बैठक में मॉक ड्रिल के उद्देश्य और महत्व पर जोर दिया गया। तत्परता मूल्यांकन के तहत संसाधनों की उपलब्धता, उपयोगिता और प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन किया जाएगा। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और पारंपरिक ज्ञान का समावेश सुनिश्चित किया जाएगा। विभिन्न रेखीय विभागों के बीच सहज और प्रभावी कार्यप्रणाली का विकास किया जाएगा, साथ ही देहरादून स्थित ICCC के साथ वास्तविक समय में वायरलेस संचार परीक्षण भी किया जाएगा।18 फरवरी 2026 को आयोजित मॉक ड्रिल की समय-सारणी में पंजीकरण और एकत्रीकरण सुबह 08:30 बजे से प्रारंभ होगा, इसके बाद उद्घाटन एवं ब्रीफिंग, उपकरण वितरण और सुरक्षा निर्देश, वायरलेस संचार ड्रिल, ICCC फायर अलर्ट प्रस्थान, मुख्य अग्निशमन अभ्यास, स्थल पर डिब्रीफिंग, वापसी और विस्तृत समापन सत्र आयोजित किए जाएंगे।मुख्य विभागों की जिम्मेदारियां बैठक में स्पष्ट की गई। वन विभाग मॉक ड्रिल के आयोजन और समन्वय का जिम्मा संभालेगा, फायर टूल्स और प्रोटेक्टिव गियर की व्यवस्था करेगा और ICCC के साथ समन्वय सुनिश्चित करेगा। आपदा प्रबंधन विभाग ICS संचालन, प्रतिक्रिया समय मापन और डेटा संग्रहण करेगा। पुलिस विभाग सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून व्यवस्था का ध्यान रखेगा। स्वास्थ्य विभाग प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सिमुलेशन के लिए टीम और एम्बुलेंस स्टैंडबाय सुनिश्चित करेगा। अग्निशमन विभाग तकनीकी मार्गदर्शन, पोर्टेबल पंप संचालन और बचाव संचालन का संचालन करेगा। राजस्व और सामुदायिक सहभागिता विभाग ग्रामीणों का संगठन और स्थानीय जल स्रोत एवं भूस्वामित्व जानकारी साझा करेगा।संचार और समन्वय तंत्र को भी अंतिम रूप दिया गया। ICCC, प्रभागीय और रेंज कार्यालय, तथा फील्ड टीम के बीच त्वरित और प्रभावी संचार व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से वन विभाग, पुलिस और आपदा प्रबंधन के बीच क्रॉस-कम्युनिकेशन किया जाएगा। कुल लक्ष्य प्रतिक्रिया समय 15 मिनट से कम रखा गया है।सुरक्षा प्रोटोकॉल में सभी प्रतिभागियों के लिए प्रोटेक्टिव गियर का उपयोग, पर्याप्त पानी पीना, टीम से अलग न होना, 50 मीटर सुरक्षा परिधि, सुरक्षित निकास मार्ग और आपातकालीन नंबर 108 के माध्यम से तुरंत मदद सुनिश्चित करना शामिल है।बैठक में संभावित चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा हुई। मौसम संबंधी बाधाओं के लिए वैकल्पिक तिथि 20 फरवरी तय की गई। पहुंच कठिनाई के लिए वैकल्पिक मार्ग और पैदल व्यवस्था बनाई गई। संचार विफलता के लिए मोबाइल नेटवर्क बैकअप का प्रबंध किया गया। सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।अगले कदम तय किए गए। 13 फरवरी को सभी विभागों को जिम्मेदारी स्पष्ट की गई और संसाधनों की पुष्टि की जाएगी। 14 से 16 फरवरी के बीच ग्रामीणों को सूचना दी जाएगी, उपकरण जांच और अंतिम तैयारी होगी। 17 फरवरी को मेडिकल किट, वाहन और वायरलेस सेट्स की अंतिम जांच की जाएगी। 18 फरवरी को मॉक ड्रिल का सफल क्रियान्वयन, डिब्रीफिंग और दस्तावेजीकरण किया जाएगा।जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने सभी विभागों से सुरक्षा, समय-पाबंदी, सामुदायिक सहभागिता और अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य वनाग्निकाल 2026 के लिए पूर्ण तत्परता सुनिश्चित करना है और सभी गतिविधियों का फोटो/वीडियो रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।

