पिथौरागढ़। कृषि विज्ञान केंद्र,गैना, पिथौरागढ़ कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग एवं संबद्ध विभागों के द्वारा जिला पिथौरागढ़ के विभिन्न ग्रामों में “खेत बचाओ अभियान” चल रहा है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती, जैविक खेती तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है और साथ ही उन्हें वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है l यह अभियान देशभर में चल रहे राष्ट्रीय “खेत बचाओ अभियान” का हिस्सा है, जिसका फोकस मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण-अनुकूल एवं मानव स्वास्थ्य को स्वस्थ बनाना है।
अभियान के तहत विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने, रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक प्रयोग को कम करने तथा जल एवं मृदा संरक्षण के उपायों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से खेती करनी चाहिए। प्राकृतिक खेती के माध्यम से किसान उत्पादन लागत घटाने के साथ-साथ दीर्घकाल तक मिट्टी की उर्वरता बनाए रख सकते हैं। इस अवसर पर किसानों से अपील की गई कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग करें, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाएं और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि का संरक्षण करें।
अभियान में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. महेन्द्र सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी श्री अमरेंद्र चौधरी, मुख्य उद्यान अधिकारी श्री अभिनव कुमार, डॉ. अलंकार सिंह, डॉ. स्वाति गर्ब्याल, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. दिनेश कुमार चौरासिया, श्री जीवन लाल एवं जिले के अन्य अधिकारी भी सभी किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के माध्यम से खेतों को बचाने के लिए किसानों को लगातार जागरूक एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रहें हैं। किसानों के लिए उर्वरकों के संतुलित प्रयोग पर चौपाल चर्चा का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बचकोट, लोहारगांव, सुवाकोट, चल, उपरतोला, रियांशी, गौरीहाट आदि ग्रामों के किसानों ने प्रतिभाग किया l
