आज आदलि कुशलि पत्रिका के तत्वावधान में दो दिवसीय पांचवें कुमाउंनी भाषा सम्मेलन का दीप प्रज्वलन के साथ जिला पंचायत सभागार में शुभारम्भ हुआ। आयोजक डाॅ. सरस्वती कोहली ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया और सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रथम सत्र में कुमाउंनी कैं अघिल बढून खिन सामाजिक, प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्तिकि जरवत उपविषय पर वक्ताओं डाॅ. अशोक पंत, डाॅ. हयात सिंह रावत, डाॅ. परमानंद चौबे, ब्रिगेडियर धीरेश जोशी ने अपना वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में कुमाउंनी भाषा सम्मेलन 2025 के विशेषांक का तथा डाॅ. सरस्वती कोहली के नए उपक्रम सोर पब्लिकेशन हाउस पिथौरागढ़ से प्रकाशित रमेश हितैषी की पुस्तक पितर कुड़ी, डाॅ. सरस्वती कोहली की पुस्तक भाना गंगनाथ एक प्रेम काथ, भूपेंद्र देव ताऊजी के नाटक भविष्य का सौदा और डाॅ. पीताम्बर अवस्थी की पुस्तक पिथौरागढ़ दर्शन का विमोचन किया गया।
भूपेंद्र सिंह बृजवाल को कुमाउंनी भाषा सेवी सम्मान, बड़ालू निवासी डाॅ. पवनेश ठकुराठी को कुमाउंनी साहित्य सेवी सम्मान, जगमोहन सिंह रावत जगमौरा को लोक भाषा सेवी सम्मान और गजेंद्र बटोही को साहित्य सेवी सम्मान प्रदान किया गया। द्वितीय सत्र में नीरज पंत, दिनेश भट्ट, कृपाल सिंह शीला, डाॅ. किशोर पंत और नवीन पंत ने पूर्वी पश्चिमी बोलिन में शब्दगत विभेद परस्पर सम्मान और स्वीकार्यता को सवाल उपविषय पर अपना वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में होशियार सिंह ज्याला, त्रिभुवन गिरी महाराज, दीपक भाकुनी, लक्ष्मी आर्या, डाॅ. आनन्दी जोशी, आशा सौन, डाॅ. नीरज चंद्र जोशी, अनीता जोशी, उमा पाटनी अवनि, संदीप कोहली, मुकेश कोहली, बलवंत कुमार, हेमराज मेहता आदि उपस्थित थे। मंच संचालन चिंतामणि जोशी और विप्लव भट्ट ने किया।
