पिथौरागढ़

जनपद पिथौरागढ़ में सीवरेज एवं अपशिष्ट जल शोधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री आशीष भटगांई ने रविवार को 5.00 एमएलडी एसटीपी प्लांट ऐंचोली तथा 1.25 एमएलडी एसटीपी प्लांट निराड़ा का स्थलीय निरीक्षण किया

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने इनलेट चैम्बर एवं एम.पी.एस. (Main Pumping Station) का गहन निरीक्षण करते हुए सीवरेज इनलेट पैरामीटरों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्लांट के पीएलसी (Programmable Logic Controller) सिस्टम तथा स्काडा (SCADA) सिस्टम की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और सीवेज इनलेट एवं आउटलेट की वास्तविक समय की निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की। इसके उपरांत जिलाधिकारी ने प्राथमिक उपचार इकाइयों से लेकर एरेशन टैंक तक संपूर्ण शोधन प्रक्रिया का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सुरक्षा मानकों में कुछ कमियां पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई तथा तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि शहर के अधिकतर नागरिकों को सीवरेज एवं एसटीपी परियोजना का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि व्यवस्था को सुचारु एवं प्रभावी बनाया जाए ताकि अधिकतम घरों को इसका लाभ मिल सके। *जिलाधिकारी ने कहा कि स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य के लिए एसटीपी का बेहतर संचालन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कार्यों की नियमित निगरानी एवं गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।*

जिलाधिकारी ने एम.पी.एस. क्षेत्र में सुरक्षा जाल लगाने, परिसर की उचित बैरिकेडिंग एवं फेंसिंग कराने, अग्निशमन यंत्रों की पर्याप्त स्थापना करने तथा नियमित सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश अधिशासी अभियंता को दिए। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समयावधि में पूर्ण की जाएं। तत्पश्चात जिलाधिकारी ने यूवी यूनिट का निरीक्षण किया तथा उपचारित जल की गुणवत्ता का परीक्षण कराया। निरीक्षण में पाया गया कि उपचार के पश्चात चन्द्रभागा आउटफॉल में छोड़ा जा रहा जल निर्धारित मानकों के अनुरूप है। उपचारित जल की गुणवत्ता उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार पाई गई। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि एसटीपी प्लांटों के संचालन, रखरखाव एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण एवं जनस्वास्थ्य सुरक्षा के उद्देश्यों की प्रभावी पूर्ति हो सके।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी डॉ दीपक सैनी, सहायक नगर आयुक्त राजदेव जायसी, पीयूष डिमरी, कवीन्द्र सिंह बिष्ट, विनय जोशी, सुब्रत सिंह आदि संबंधित अधिकारी मौजूद थे।