पिथौरागढ़। 62 दिन के ऐतिहासिक “पर्यावरण बचाओ–सीमांत बचाओ” आंदोलन की सफलता पर सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या का आयोजन

पिथौरागढ़। पूर्व सैनिक संगठन, पिथौरागढ़ द्वारा भगवान श्रीराम एवं भगवान भोलेनाथ की पावन भूमि रामलीला मैदान टकाना में सुंदरकांड पाठ एवं भजन संध्या का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, उनके परिवारजन, मातृशक्ति, शामिल हुए.

पूर्व सैनिक संगठन ने कहा कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की धरोहर, पर्यावरण और यहां दशकों से कार्यरत 130 टीए पर्यावरण बटालियन को बचाने के लिए पूर्व सैनिकों ने जिस ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व किया, वह अपने आप में जनपद के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। आंदोलन के दौरान पूर्व सैनिकों ने विपरीत परिस्थितियों, मौसम और अनेक कठिनाइयों के बावजूद लगातार 62 दिनों तक धरना, प्रदर्शन एवं विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से संघर्ष किया।
“विजय मिलेगी तभी फिर मनाएंगे होली” — संकल्प हुआ पूरा
आंदोलन के दौरान पूर्व सैनिकों ने संकल्प लिया था कि जब तक पर्यावरण बटालियन को बचाने की दिशा में निर्णायक सफलता नहीं मिलती, तब तक वे होली जैसे पर्व-त्योहारों को भी उत्सव के रूप में नहीं मनाएंगे और विजय के बाद ही पुनः टीका लगाकर उत्सव मनाएंगे।

कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व सैनिकों एवं परिवारजनों ने एक-दूसरे को विजय का टीका लगाकर उस संकल्प की पूर्णता का संदेश दिया। सुंदरकांड एवं भजनों के माध्यम से भगवान से सभी के मंगल, सीमांत जनपद की खुशहाली और समाज में शांति एवं सद्भाव की प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैनिक संगठन ने वर्तमान सरकार के प्रति गहरी नाराज़गी एवं चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पर्यावरण बटालियन को विस्थापित किए जाने के निर्णय को निरस्त किए जाने की बात सामने आने के बावजूद आज तक पूर्व सैनिक संगठन को संबंधित आदेश की आधिकारिक प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है।

संगठन ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर विषय है कि इतने लंबे और ऐतिहासिक आंदोलन के बाद भी न तो प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा और न ही अन्य द्वारा इस विषय पर पूर्व सैनिक संगठन से कोई औपचारिक संवाद किया गया है।

पूर्व सैनिक संगठन द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी प्रेषित किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद यदि सरकार द्वारा इस मामले में पारदर्शिता नहीं दिखाई जाती, संबंधित आदेश की प्रति संगठन को उपलब्ध नहीं कराई जाती और पूर्व सैनिकों के साथ औपचारिक संवाद नहीं किया जाता है, तो इसे संगठन कतई स्वीकार नहीं करेगा।

पूर्व सैनिक संगठन ने सरकार को स्पष्ट और कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा—

“हमने 62 दिन तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया है। हमने सीमांत की अस्मिता, पर्यावरण और यहां के युवाओं के रोजगार के लिए अपने त्योहारों तक का त्याग किया है। यदि सरकार इस विषय को केवल आश्वासनों तक सीमित रखती है और पूर्व सैनिकों को आधिकारिक आदेश तक उपलब्ध नहीं कराती है, तो शीघ्र ही पूर्व सैनिक एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।”

संगठन ने सभी पूर्व सैनिकों, परिवारजनों, मातृशक्ति, युवाओं तथा आंदोलन में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले प्रत्येक नागरिक का आभार भी व्यक्त किया गया।
संगठन धर्मगुरु नवीन गुर्रानी साहब के देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती दीपा जोशी जी, श्रीमती पर्मिला बोहरा, कैप्टेन विक्रम सिंह सेना मैडल, ललित रावत, विजेंद्र मेहता, हर सिंह व बड़ी संख्या मै जनपद के मातृशक्ति तथा पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।