पिथौरागढ़। 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन का आंदोलन आज 26वें दिन और अधिक उग्र जनसमर्थन के साथ आगे बढ़ा। *ऐंचोली क्षेत्र* से आज एक विशाल विरोध रैली निकालकर जनपद प्रशासन के माध्यम से माननीय रक्षा मंत्री, पर्यावरण मंत्री तथा मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया। रैली में उमड़ा जनसैलाब यह स्पष्ट संकेत दे रहा था कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की जनता अब अपने अस्तित्व और पर्यावरण की रक्षा के लिए निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है। रैली के दौरान पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए *पद्मश्री से सम्मानित बसंती दीदी* ने अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ की यह धरती केवल सीमाओं की रक्षा करने वाले वीरों की ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की भी एक जीवंत धरोहर रही है। यदि पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रही 130 पर्यावरण बटालियन को ही इस पहाड़ से विस्थापित किया जाएगा, तो यह न केवल पर्यावरण बल्कि पूरे सीमांत क्षेत्र के भविष्य के साथ घोर अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर इस धरती को सुरक्षित रखना है, लेकिन जो लोग इस कार्य में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं उन्हें ही यहां से हटाना अत्यंत दुखद और निंदनीय है। संगठन की स्थापना को अपना नैतिक समर्थन देने *श्री विमल सिंह बोहरा* जी *काशीपुर* से जनपद पहुंचे जिन्होंने कहा कि यह मेरे जनपद के भविष्य का प्रश्न है इसलिए यह मेरी भी नैतिक जिम्मेदारी होती है इस आंदोलन को मैं सहयोग करूं। जनपद निवासी बोहरा जी प्राइम हॉस्पिटल काशीपुर के संस्थापक भी हैं जो कि जनपद से इलाज के लिए काशीपुर जाने वाले हर व्यक्ति के लिए बेहतरीन सुविधा देने हेतु हमेशा तत्पर रहते हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति, युवा, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि *130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन जनपद पिथौरागढ़ के भविष्य से सीधा खिलवाड़ है और इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।* इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी और असंवेदनशीलता को लेकर भी तीखा आक्रोश देखने को मिला। आंदोलनकारियों ने कहा कि इतने दिनों से चल रहे इस जनआंदोलन की अनदेखी करना जनभावनाओं का अपमान है। सांसद महोदय द्वारा इस आंदोलन को गलत दिशा देने के प्रयास और क्षेत्र के तीनों विधायकों द्वारा इतने संवेदनशील मुद्दे को विधानसभा के पटल पर तक न उठा पाना बेहद निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उपस्थित लोगों ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि जनप्रतिनिधि जनभावनाओं को समझने और उनके साथ खड़े होने में असमर्थ हैं, तो यह जनपद स्वयं को *नेतृत्व विहीन* महसूस करने लगा है। रैली के दौरान सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा जनाक्रोश इस बात का संकेत था कि अब यह आंदोलन केवल एक संगठन का नहीं बल्कि पूरे जनपद का संघर्ष बन चुका है। आम जनमानस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की अस्मिता और भविष्य की लड़ाई है और इसके लिए हर व्यक्ति कमर कस चुका है। पूर्व सैनिक संगठन ने भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में जनपद के अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की विशाल रैलियां आयोजित की जाएंगी, ताकि इस जनआवाज़ को और अधिक बुलंद किया जा सके और सरकार को जनभावनाओं का सम्मान करने के लिए बाध्य किया जा सके। आज की रैली एवं धरने में सीनियर सिटीजन, यूकेडी, रामलीला कमेटी टकाना सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी भाग लेकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया। धरने में प्रमुख रूप से ऐंचोली वार्ड के सम्मानित महिलाएं, बच्चे, पुरुष और बड़ी संख्या में आम जनमानस उपस्थित रहे।आंदोलनकारियों का स्पष्ट संदेश है —*“पर्यावरण बचेगा तो पहाड़ बचेगा,और पहाड़ बचेगा तो सीमांत बचेगा**130 पर्यावरण बटालियन का विस्थापन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं।”
