पिथौरागढ़। आदि कैलाश में भगवान शिव के पवित्र मंदिर के कपाट आज विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस पावन अवसर पर क्षेत्र में धार्मिक आस्था, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया पूर्ण विधि-विधान एवं पारंपरिक रं रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई। शिव-पार्वती मंदिर के पुजारी गोपाल सिंह कुटियाल, वीरेंद्र सिंह कुटियाल एवं रमेश कुटियाल द्वारा प्रातः लगभग 10:30 बजे विधिवत पूजा-अर्चना की गई तथा देश, प्रदेश एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई। इसके उपरांत मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के पश्चात मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण व्याप्त हो गया, जहां यात्रियों एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा हिंदी एवं रं भाषा में भगवान शिव के भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए गए।
ग्राम प्रधान नगेन्द्र सिंह कुटियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस पावन अवसर पर ग्रामीणों द्वारा लगभग 100 किलोग्राम फूलों से मंदिर एवं परिसर को भव्य रूप से सजाया गया।कपाट खुलने के समय मौसम भी पूरी तरह अनुकूल रहा, जिससे लगभग 250 से अधिक यात्रियों एवं स्थानीय ग्रामीणों को आदि कैलाश पर्वत के दिव्य एवं स्पष्ट दर्शन प्राप्त हुए।इस अवसर पर आईटीबीपी के कमांडेंट संजय कुमार, 65 आरसीसी ग्रेफ के ओसी लेफ्टिनेंट कर्नल अखिल कौशल देव सहित स्थानीय ग्रामीण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कपाट उद्घाटन के साथ ही वर्ष 2026 की आदिकैलाश यात्रा एवं ॐ पर्वत दर्शन यात्रा का भी विधिवत शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर स्थानीय जनता, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, आईटीबीपी, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के दौरान सम्पूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति एवं विश्व कल्याण की कामना की।जिला प्रशासन द्वारा यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम बनाने हेतु व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। यात्रा मार्गों की स्थिति, आवास व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, संचार प्रणाली एवं सुरक्षा प्रबंधन को सुदृढ़ किया गया है, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को निर्बाध एवं सुरक्षित यात्रा अनुभव प्राप्त हो सके।
प्रशासन द्वारा यात्रियों से अपील की गई है कि वे यात्रा के दौरान निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सावधानियां अवश्य बरतें। यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
