पिथौरागढ़ |

पिथौरागढ़ में धूमधाम से मनाया गया 3 पैरा स्पेशल फोर्सेज का विजय दिवस (शोलाटाग दिवस), वीर शहीदों को किया गया नमन
आज दिनांक 7 नवंबर 2026 को जनपद पिथौरागढ़ में 3 पैरा स्पेशल फोर्सेज (1 कुमाऊं) के पूर्व सैनिक अधिकारियों एवं कनिष्ठ कमीशंड अधिकारियों द्वारा बटालियन का विजय दिवस (शोलाटाग दिवस) अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया।


इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बढ़ाबे गांव के जांबाज पैराट्रूपर शहीद पूर्णानंद जोशी जी (जो वर्ष 1948 के युद्ध में देश के लिए शहीद हुए थे) के भतीजे नायब सूबेदार निरीश जोशी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। ज्ञात हो कि 3 पैरा स्पेशल फोर्सेज हर साल 7 नवंबर को शोलाटिंग विजय दिवस के रूप में मनाती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बटालियन का पराक्रम
कार्यक्रम के दौरान 3 पैरा स्पेशल फोर्सेज के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। 7 नवंबर 1947 को जम्मू और कश्मीर में हुए ऐतिहासिक युद्ध में इस बटालियन ने अत्यंत महत्वपूर्ण और वीरतापूर्ण भूमिका निभाई थी। बटालियन ने दुश्मन के ठिकानों पर करारा प्रहार किया, जिससे शत्रुओं को भारी क्षति उठानी पड़ी; इस संघर्ष में दुश्मन के 472 सैनिक मारे गए और 300 घायल हुए थे।


3 पैरा (1 कुमाऊं) श्रीनगर के पास मोर्चा संभालने वाली पहली बटालियन थी। इस युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देने के लिए स्वतंत्रता के पश्चात भारतीय सेना द्वारा बटालियन को प्रतिष्ठित युद्ध सम्मान (Battle Honour) प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त, इस यूनिट के वीर सैनिकों को 9 वीर चक्र, 4 महावीर चक्र और 2 अशोक चक्र से अलंकृत किया जा चुका है।

इस विजय दिवस समारोह के अवसर पर सेना के कई वरिष्ठ एवं सम्मानित सेवानिवृत्त अधिकारी और कार्मिक उपस्थित रहे, जिनमें
कर्नल विनोद सिंह (एस.एम.),लेफ्टिनेंट कर्नल त्रिलोक सिंह सौन, कैप्टन दयाल सिंह,कैप्टन देवी चंद्र,वी.एस.एम,कैप्टन सुनील मल,सूबेदार मेजर भूपेंद्र सिंह,सूबेदार मेजर सुरेश साही,सूबेदार मेजर राजेंद्र कापड़ी,सूबेदार मेजर गोविंद सिंह,सूबेदार नारायण सिंह खड़ायत,नायब सूबेदार महेश चंद्र,नायब सूबेदार लक्ष्मण सिंह, सेवानिवृत्त
सूबेदार मेजर दलेर खवान सिंह, सेवानिवृत्त
सूबेदार मेजर राजिंदर सिंह, सेवानिवृत्त
नायब सूबेदार महेश्वर चंद, सेवानिवृत्त
नायब सूबेदार रघुवर सिंह, सेवानिवृत्त
कार्यक्रम का समापन देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और आपसी सौहार्द के साथ सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।