डीएम भटगांई का फोकस: पिथौरागढ़ में कीवी समेत अन्य बागवानी पौधों के लिए सरकारी सहायता और प्रशिक्षण की दिशा में पहल*
*पिथौरागढ़ में डीएम भटगांई की ओर से कीवी और अन्य फसलों के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने का नया कदम*
*जायका (JICA) द्वारा वित्तपोषित UKIHDP परियोजना से पिथौरागढ़ में कृषि विकास को नई दिशाUKIHDP परियोजना के तहत पिथौरागढ़ के किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार सहायता मिल रही है**जिलाधिकारी का दिशा-निर्देश: पिथौरागढ़ में जायका योजना के कार्यों को गति देने और किसानों को अधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश**पिथौरागढ़, 08 जनवरी 2026*: कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता आशीष भटगांई ने की, जिसमें मुख्य उद्यान अधिकारी अभिनव कुमार ने जायका योजना (JICA) और उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (UKIHDP) के तहत चल रही विभिन्न गतिविधियों पर विस्तृत जानकारी दी।बैठक में जायका (जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी) द्वारा वित्तपोषित UKIHDP परियोजना के अंतर्गत जनपद पिथौरागढ़ में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से कीवी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, किसानों को इनपुट, प्रशिक्षण और बाजार सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, बागवानी को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी किया जा रहा है, जिनमें Kobo Collect App जैसे डिजिटल उपकरण शामिल हैं, जो किसानों को उत्पादन, विपणन और फसल संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी संकलित करने में मदद करते हैं।जायका (JICA) और UKIHDP परियोजना जायका, या जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी, जापान सरकार द्वारा स्थापित एक वैश्विक संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य विकासशील देशों को आर्थिक और सामाजिक प्रगति में सहायता प्रदान करना है। यह संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन, और बागवानी जैसी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करती है।जायका की वित्तीय सहायता से उत्तराखंड राज्य में UKIHDP (उत्तराखंड इंटीग्रेटेड हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट) परियोजना लागू की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बागवानी को बढ़ावा देना, किसानों की आय में वृद्धि करना और बागवानी आधारित स्थिर आजीविका को सुनिश्चित करना है। पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जिलों में विशेष रूप से कीवी जैसी बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि इन क्षेत्रों में कृषि विकास को गति मिल सके।जायका योजना का मुख्य उद्देश्य पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आय में वृद्धि करना और बागवानी आधारित आजीविका को मजबूत करना है। जापान सरकार द्वारा वित्तपोषित इस योजना के तहत किसानों को बेहतर रोपण सामग्री, प्रशिक्षण, और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, परियोजना के माध्यम से पिथौरागढ़ के किसानों को कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का लाभ मिल रहा है, जो उनके उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर रहा है।इसके अलावा, यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत कृषि प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए भी कार्यरत है, ताकि किसानों को आने वाले समय में अधिक स्थिर और सुरक्षित आजीविका मिल सके।बैठक में यह बताया गया कि किसानों को UKIHDP परियोजना के उद्देश्यों और इसके लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही, Kobo Collect App के माध्यम से कीवी उत्पादन की आवश्यकताओं जैसे इनपुट, उत्पादन और विपणन संबंधी डेटा संग्रह किया जा रहा है।किसानों की अपेक्षाओं को समझते हुए, उन्हें बेहतर रोपण सामग्री, प्रशिक्षण, और बाजार सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और उद्यान विभाग के बीच समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।पिथौरागढ़ के लिए महत्वपिथौरागढ़ जिले में बागवानी की फसलों, विशेष रूप से कीवी, को बढ़ावा देने की योजना के तहत किसानों को नवीनतम तकनीकों और बाजारों तक पहुंचने में मदद मिल रही है। इस परियोजना से किसानों को न केवल उनकी उपज की बेहतर कीमत मिल रही है, बल्कि यह पिथौरागढ़ के बागवानी क्षेत्र को एक नया आयाम भी दे रहा है। इस प्रकार, यह परियोजना न केवल किसानों की आय में वृद्धि करेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी, जो अंततः राज्य की समृद्धि में योगदान करेगा।बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने इस परियोजना की गतिविधियों में और तेजी लाने और अधिक से अधिक किसानों को इस योजना से जोड़ने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि किसानों को समय पर सभी प्रकार की सहायता और जानकारी उपलब्ध हो, ताकि वे परियोजना के लाभ का पूर्ण उपयोग कर सकें।बैठक में मुख्य उद्यान अधिकारी ने बताया कि उक्त योजना के तहत जनपद के चार विकास खंडों में सेब, कीवी, अदरक, हल्दी सहित अन्य उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत चयनित किसानों को उन्नत रोपण सामग्री, तकनीकी प्रशिक्षण, पौध संरक्षण, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा विपणन से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, किसानों को क्लस्टर आधारित बागवानी मॉडल से जोड़ा जा रहा है, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित हो सके।मुख्य उद्यान अधिकारी ने यह भी बताया कि परियोजना के अंतर्गत प्रगतिशील किसानों को प्रदर्शन प्लॉट्स (डेमोन्स्ट्रेशन) के माध्यम से आधुनिक बागवानी तकनीकों से अवगत कराया जा रहा है, जिससे अन्य किसान भी प्रेरित होकर इन फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बैठक में मुख्य कृषि अधिकारी अमरेन्द्र चौधरी सहित संबंधित विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति रही।

