पिथौरागढ़ ।
नंदा देवी की छांव और गोरी गंगा के तट पर योग, मिलम में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का अनूठा आयोजन
वाइब्रेंट विलेज मिलम से दुनिया को योग का संदेश, आईटीबीपी जवानों संग मनाया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
हिमालय की ऊंचाइयों पर योग का संगम, मिलम में पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी और मंत्री रेखा आर्या ने किया योगाभ्यास
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सुदूरवर्ती एवं ऐतिहासिक मिलम गांव में स्थित आईटीबीपी 14वीं वाहिनी परिसर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हिमालय की बर्फाच्छादित चोटियों, मिलम ग्लेशियर और गोरी गंगा नदी के मनोरम प्राकृतिक परिवेश के बीच आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पद्म भूषण भगत सिंह कोश्यारी तथा जनपद प्रभारी मंत्री एवं महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने आईटीबीपी के जवानों, स्थानीय ग्रामीणों तथा जनप्रतिनिधियों के साथ योगाभ्यास किया।
इस अवसर पर मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि मिलम की पवित्र धरती पर योग करना उनके जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है। उन्होंने कहा कि एक ओर नंदा देवी की बर्फ से ढकी भव्य चोटियां, दूसरी ओर मिलम ग्लेशियर का विहंगम दृश्य तथा गोरी गंगा की कल-कल बहती धारा के बीच योगाभ्यास करना एक अद्भुत और आध्यात्मिक अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि प्रकृति के इस अनुपम आंगन में योग का अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
मंत्री ने कहा कि मिलम तक पहुंचने का सफर कठिन और चुनौतीपूर्ण था। ठंडी हवाओं तथा दुर्गम रास्तों के बावजूद जब हिमालय की इस धरती पर योग किया गया तो मन को अद्भुत शांति, ऊर्जा और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई।
योग दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि 21 जून हम सभी को यह स्मरण कराता है कि योग हमारे जीवन का अभिन्न अंग होना चाहिए। योग एक ऐसी व्यवस्था है जो पूर्णतः निःशुल्क होते हुए भी शरीर और मन को स्वस्थ, संतुलित तथा ऊर्जावान बनाती है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति नियमित रूप से योग को अपने जीवन में अपनाता है तो वह स्वस्थ और निरोग जीवन की दिशा में अग्रसर होता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत की प्राचीन योग परंपरा को आज वैश्विक पहचान मिली है। योग ने पूरी दुनिया को स्वस्थ जीवन, एकता, संतुलन और मानव कल्याण का संदेश दिया है।
मिलम गांव के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह देश और प्रदेश के सबसे दूरस्थ गांवों में से एक है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य के साथ अनेक चुनौतियां भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत सीमांत गांवों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों से संवाद करते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड एवं पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से पिछले 12 वर्षों से पूरी दुनिया योग दिवस मना रही है। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है, जिसकी महिमा प्राचीन काल से ही रही है और आज विश्व समुदाय ने भी इसे स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि मिलम कभी उत्तराखंड का प्रमुख व्यापारिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र हुआ करता था। आज इस गांव को पुनः उसके गौरवशाली स्वरूप में स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वाइब्रेंट विलेज योजना के माध्यम से विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत और दूरस्थ गांवों में योग दिवस जैसे कार्यक्रमों का आयोजन न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि इन क्षेत्रों के विकास और उनकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
श्री कोश्यारी ने इस आयोजन को अभिनव एवं सराहनीय बताते हुए आईटीबीपी, सेना के जवानों तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों के साथ-साथ ऐसे सीमांत गांवों में भी राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए, जिससे इन क्षेत्रों को नई पहचान और विकास की गति मिल सके।
कार्यक्रम में आईटीबीपी 14वीं वाहिनी के कमांडेंट राम भरत सिंह कुशवाहा, अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र सिंह,भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी, जिला पंचायत अध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपिका बोहरा, नगर पंचायत अध्यक्ष राजेन्द्र पांगती, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी चंद्रकला भैसोड़ा,सैन्य अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्थानीय ग्रामीणों एवं बड़ी संख्या में आईटीबीपी के जवानों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के दौरान योग के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा सीमांत क्षेत्रों के विकास एवं सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
