जनपद पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन के प्रस्तावित विस्थापन के विरोध में पूर्व सैनिक संगठन द्वारा चलाया जा रहा धरना आज 24वें दिन भी लगातार जारी रहा। यह आंदोलन अब केवल पूर्व सैनिकों तक सीमित न रहकर जनपद की सामूहिक आवाज बनता जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों से पूर्व सैनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा जागरूक नागरिकों का लगातार समर्थन इस आंदोलन को मिल रहा है।
पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट कहा कि यह केवल एक *सैन्य इकाई के विस्थापन का विषय नहीं, बल्कि सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के अस्तित्व, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है*। पहाड़ की इस अत्यंत महत्वपूर्ण पर्यावरण बटालियन को सुरक्षित रखने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों से लोग आगे आकर अपना नैतिक समर्थन दे रहे हैं।
 धरने को राजधानी देहरादून से भी लगातार समर्थन प्राप्त हो रहा है। ब्रिगेडियर सर्वेश्वर डंगवाल (सेवानिवृत्त), कर्नल डी पी डिमरी (सेवानिवृत) पर्यावरण एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व अनूप नौटियाल जी तथा सुजाता पॉल जी द्वारा इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया जा रहा है। इन सभी द्वारा राज्य और केंद्र सरकार को व्यक्तिगत स्तर पर पत्र प्रेषित कर पर्यावरण बटालियन के विस्थापन का विरोध दर्ज कराया गया है। इससे जनपद के पूर्व सैनिकों में भी एक नया उत्साह और विश्वास देखने को मिला है।
 इसी क्रम में आज धरना स्थल पर सीनियर सिटीजन तथा रामलीला कमेटी द्वारा भी आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दिया गया।
धरने में मौजूद पूर्व सैनिकों ने कहा कि यह जनपद के अस्तित्व और भविष्य को तय करने वाली लड़ाई है। उन्होंने कहा कि *जनपद के जनप्रतिनिधि—चाहे वह विधायक हों या सांसद—इस मुद्दे पर आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं*। पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा इस विषय पर गंभीर प्रयास नहीं किए गए और पर्यावरण बटालियन का विस्थापन नहीं रोका गया, तो *पूर्व सैनिक संगठन ऐसे जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाकर जवाबदेह ठहराएगा।*

पूर्व सैनिकों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही इस निर्णय को निरस्त नहीं किया गया, तो वर्ष 2027 के चुनाव से पहले व्यापक चेतना यात्रा निकालकर जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जवाब देने के लिए मजबूर किया जाएगा।
धरना स्थल पर मौजूद पूर्व सैनिकों ने कहा कि आंदोलन दिन-प्रतिदिन व्यापक रूप ले रहा है और जनभावनाएं लगातार उबाल पर हैं। अब देखना होगा कि जनपद की इस महत्वपूर्ण लड़ाई को सरकार कब गंभीरता से सुनती है, क्योंकि यह मुद्दा अब हर स्तर पर उठने लगा है।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि यदि प्रदेश और केंद्र सरकार का यही रवैया रहा, तो आने वाला समय इस जनआक्रोश को एक बड़े आंदोलन का रूप दे सकता है।
आज धरने पर गिरधर सिंह बिष्ट सलाहकार सीनियर सिटीजन मंच, सूबेदार मेजर भुवन गढ़कोटी, नायक गोविंद बल्लभ पंत, कैप्टन सुंदर सिंह खरायत, नायब सूबेदार देवेंद्र सिंह दिगारी, सूबेदार सुरेंद्र सिंह कोरंगा, नायब सूबेदार भगवान रौतेला,सेना मेडल, सूबेदार मेजर त्रिलोक सिंह, कैप्टन दीपक भट्ट, सूबेदार मेजर गोविंद सिंह बिष्ट सहित दर्जनों पूर्व सैनिक उपस्थित रहे।